गजब घोटाला! लाइनमैन से लेकर अफसर तक, बिजली विभाग में खुलेआम भ्रष्टाचार का खेल!
अंबेडकरनगर।
बिजली विभाग में घूसखोरी और घपलों की बिजली इतनी तेज़ दौड़ रही है कि आम आदमी के बिल से लेकर अफसरों की जेब तक सबकुछ जल रहा है। इल्तिफातगंज इलाके में तो खेल ही अलग लेवल पर है — यहां कर्मचारी घर के पीछे 50 मीटर दूर ही सरकारी नौकरी कर रहे हैं और अफसर बने बैठे हैं ‘कागज़ों के बादशाह’!
घर बैठे नौकरी, मीटर गायब, जेब भरपूर!
गांवों में मीटर लगना था, लेकिन मीटर तो कभी आया ही नहीं — आया तो सिर्फ उपभोक्ताओं से मोटी रकम वसूलने का तरीका! लाइनमैन और ठेकेदार ने मिलकर सैकड़ों कनेक्शन बिना मीटर के जोड़ दिए। उपभोक्ता रोज़ घूस दें तो बिजली चले, वरना लाइन काट दी जाती है।
सीडीएफ-आरडीएफ-आईडीएफ — लूट का नया फार्मूला!
बिजली बिल में गड़बड़ी दिखाने के लिए सीडीएफ (सीलिंग डिफेक्टिव), आरडीएफ (रिडिंग डिफेक्टिव) और आईडीएफ (इंस्टॉलेशन डिफेक्टिव) का तिगड्डा खेला जा रहा है। नाम अंग्रेज़ी में, खेल देसी — बिल में फर्जी खामी डालो, उपभोक्ता से ‘रिफ्रेशमेंट’ वसूली करो, सब खुश!
रीविजन का खेल — बिल ठीक करने के नाम पर मोटी उगाही!
रीविजन शब्द सुनते ही आम जनता सोचती है कि गलती सुधरेगी, लेकिन यहां गलती सुधारने के नाम पर हजारों की चपत लगाई जा रही है। शिकायत करो तो कर्मचारी कह देते हैं — “जाओ साहब से मिल लो, वही ठीक करेगा, लेकिन चाय-पानी का इंतज़ाम कर लो!”
वरिष्ठ अधिकारी भी बगलें झांकते हैं!
सबसे मजेदार बात — ये सारा खेल अफसरों के सामने हो रहा है और साहब लोग चुपचाप फाइलों में रीविजन ढूंढ रहे हैं! अफसर तो खुद कहते पाए गए — “सब ठीक है, कहीं कोई दिक्कत नहीं!”
जनता बोली — अब तो जागो सरकार!
अब इलाके के लोग बोले — “सरकार जी, कभी बिजली काटो, कभी भ्रष्टाचार काटो! हम तो दोनों में ही जल रहे हैं!”
अब देखना है कि इस खेल का मीटर कब उतरेगा और किसकी कुर्सी का फ्यूज पहले उड़ता है!










